NON VEG

राजकोट, वडोदरा, भावनगर के बाद अब अहमदाबाद में भी मांस, मटन, मछली और अंडे की लॉरियों पर सार्वजनिक रूप से प्रतिबंध लगा दिया गया है. अहमदाबाद शहर में सभी सार्वजनिक सड़कों, मंदिरों, उद्यानों, हॉल और अन्य सार्वजनिक स्थानों के 100 मीटर के भीतर नॉन-वेज लॉरियों को खड़े होने से रोकने के लिए सोमवार को नगर नियोजन समिति की बैठक में यह निर्णय लिया गया. इतना ही नहीं बिना लाइसेंस की दुकानों में मांस, मटन, मछली या अंडे की बिक्री पर भी कार्रवाई की जाएगी.

गुजरात में 40% लोग मांसाहारी हैं, 38.2% महिलाएं मांस, अंडे खाती हैं

  • जनगणना नमूना पंजीकरण प्रणाली सर्वेक्षण 2014 के निष्कर्षों के अनुसार, गुजरात में 40% लोग मांसाहारी हैं, जिनमें 39.9% पुरुष और 38.2% महिलाएं हैं.
  • मांसाहार के मामले में भी गुजरात के लोग हरियाणा, राजस्थान और पंजाब के लोगों से आगे हैं. देश में मांसाहार खाने वाले 71 प्रतिशत लोग है. 2014 के सर्वेक्षण के अनुसार, तेलंगाना में 98.7 प्रतिशत लोग मांसाहारी हैं.

प्रतिबंध क्यों?अहमदाबाद कोर्पोरेशन का जवाब: लोगों की पसंद का हनन होता है.

अहमदाबाद नगर निगम की टाउन प्लानिंग एंड एस्टेट कमेटी के अध्यक्ष देवांग दानी ने कहा कि मांस, मटन, मछली और अंडे की लॉरी शहर में सार्वजनिक सड़कों पर चलने के कारण मांसाहारी लॉरियों पर प्रतिबंध सार्वजनिक शालीनता का उल्लंघन है. इसकी बदहाली के कारण यहां के नागरिकों को निकलने में परेशानी हो रही है.

नियम: मांस, मटन को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित नहीं किया जाना चाहिए, भले ही लाइसेंस मिला हुआ हो

अहमदाबाद में मांस, मटन, मछली या अंडे बेचने वाली दुकानों के पास लाइसेंस होने पर भी वे ऐसी वस्तुओं को सार्वजनिक नहीं कर सकेंगे. यदि ऐसी दुकानों में मांस-मटन, मछली, अंडे इस प्रकार रखे जाते हैं कि वे जनता को दिखाई देते हैं, तो उन्हें पहली बार निर्देश दिया जाएगा कि वे ऐसी सभी वस्तुओं को इस तरह रखें कि वे जनता को दिखाई न दें, यदि निर्देश का पालन नहीं करने पर सील होगी दुकान.

By Newzzar

Leave a Reply

Your email address will not be published.