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एंटीलिया केस और मनसुख हिरेन की हत्या के मामले में गिरफ्तार 10 आरोपियों में से 3 पर से यूएपीए की धारा हटा ली गई है. इस बात का खुलासा हाल ही में दाखिल हुई एनआईए की चार्जशीट से हुआ. सूत्रों की माने तो एनआईए ने इस बात का जिक्र अपनी चार्जशीट में भी किया है.

चार्जशीट के मुताबिक़, बर्खास्त पुलिस अधिकारी रियाजद्दीन काजी, बर्खास्त कॉन्सटेबल विनायक शिंदे और नरेश गोर को बड़ी राहत मिली है. उनपर से यूएपीए की धाराएं हटाई गई हैं और अब उन्हें सिर्फ़ आईपीसी की धारा 201 और 120 (ब) के तहत आरोपी बताया गया है.

रियाजद्दीन काजी

रियाजद्दीन काजी एपीआई रैंक के पुलिस अधिकारी हैं और बर्खास्त पुलिस अधिकारी सचिन वाजे के साथ क्राइम ब्रांच के सीआईयू में पोस्टेड थे. मुंबई क्राइम ब्रांच के पूर्व सहायक पुलिस निरीक्षक रियाजुद्दीन काजी को 11 अप्रैल को गिरफ्तार किया गया था. वह मुंबई पुलिस की क्राइम इंटेलिजेंस यूनिट में सचिन वाजे के साथ जुड़े थे  और वो वाजे के काफी भरोसेमंद थे.

रियाजुद्दीन काजी से महत्वपूर्ण सबूतों को नष्ट कर दिया था, क्योंकि यह मामला महाराष्ट्र ATS एनआईए के पास जा सकता है. उसने महत्वपूर्ण हार्ड डिस्क, डीवीआर और लैपटॉप को मीठी नदी में फेंक दिया और अन्य महत्वपूर्ण सबूतों को नष्ट करने में वाजे की मदद की थी.

 नरेश गोर को 21 मार्च को महाराष्ट्र ATS ने गिरफ्तार किया था. उसने वाझे को सिमकार्ड प्रदान करने में सहायक था, जिसका उपयोग अपराध में किया जाता था. मनसुख को कॉल करने के लिए एक सिम का इस्तेमाल किया गया था और अन्य के साथ बातचीत करने के लिए वाजे की तरफ से चार अन्य सिम कार्ड का इस्तेमाल किया गया था.

 

By Newzzar

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