ganesha

आने वाली 10 सितंबर 2021 को गणेश चतुर्थी (Ganesh Chaturthi 2021) का उत्सव मनाया जाएगा. मुख्यतः और मूलरूप से यह महाराष्ट्र का पर्व है, लेकिन गणेश जी की मान्यता पूरे भारत में है. बल्कि उत्तर से लेकर दक्षिण तक उनका नाम सर्वव्यापी है. गणेश प्रारंभ के देवता हैं और मंगलकारी हैं. कौन हैं गणेश और क्या हैं उनसे जुड़े तथ्य जो शास्त्रों में बताए गए हैं, इस पर डालते हैं एक नजर-

1.किसी भी देव की आराधना के आरम्भ में किसी भी सत्कर्म व अनुष्ठान में, उत्तम-से-उत्तम और साधारण-से-साधारण कार्य में भी भगवान गणपति का स्मरण, उनका विधिवत पूजन किया जाता है. इनकी पूजा के बिना कोई भी मांगलिक कार्य को शुरू नहीं किया जाता है. यहाँ तक की किसी भी कार्यारम्भ के लिए ‘श्री गणेश’ एक मुहावरा बन गया है. शास्त्रों में इनकी पूजा सबसे पहले करने का स्पष्ट आदेश है.

2. गणेश जी की पूजा वैदिक और अति प्राचीन काल से की जाती रही है. गणेश जी वैदिक देवता हैं क्योंकि ऋग्वेद-यजुर्वेद आदि में गणपति जी के मन्त्रों का स्पष्ट उल्लेख मिलता है.

3  शिवजी, विष्णुजी, दुर्गाजी, सूर्यदेव के साथ-साथ गणेश जी का नाम हिन्दू धर्म के पाँच प्रमुख देवों (पंच-देव) में शामिल है. जिससे गणपति जी की महत्ता साफ़ पता चलती है.

4. ‘गण’ का अर्थ है – वर्ग, समूह, समुदाय और ‘ईश’ का अर्थ है – स्वामी. शिवगणों और देवगणों के स्वामी होने के कारण इन्हें ‘गणेश’ कहते हैं.

5. शिवजी को गणेश जी का पिता, पार्वती जी को माता, कार्तिकेय (षडानन) को भ्राता, ऋद्धि-सिद्धि (प्रजापति विश्वकर्मा की कन्याएँ) को पत्नियाँ, क्षेम व लाभ को गणेश जी का पुत्र माना गया है.

6. श्री गणेश जी के बारह प्रसिद्ध नाम शास्त्रों में बताए गए हैं; जो इस प्रकार हैं: 1. सुमुख, 2. एकदंत, 3. कपिल, 4. गजकर्ण, 5. लम्बोदर, 6. विकट, 7. विघ्नविनाशन, 8. विनायक, 9. धूम्रकेतु, 10. गणाध्यक्ष, 11. भालचंद्र, 12. गजानन.

7. गणेश जी ने महाभारत का लेखन-कार्य भी किया था. भगवान वेदव्यास जब महाभारत की रचना का विचार कर चुके तो उन्हें उसे लिखवाने की चिंता हुई. ब्रह्माजी ने उनसे कहा था कि यह कार्य गणेश जी से करवाया जाए.

8. पौराणिक ग्रंथों के अनुसार ‘ॐ’ को साक्षात गणेश जी का स्वरुप माना गया है. जिस प्रकार प्रत्येक मंगल कार्य से पहले गणेश-पूजन होता है, उसी प्रकार प्रत्येक मन्त्र से पहले ‘ॐ’ लगाने से उस मन्त्र का प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है.

गणेश चतुर्थी का मुहूर्त
1.  इस पर्व में मध्याह्न के समय मौजूद (मध्यान्हव्यापिनी) चतुर्थी ली जाती है.
2.  इस दिन रविवार या मंगलवार हो तो यह महा-चतुर्थी हो जाती है.

गणेश पूजन के लिए मध्याह्न मुहूर्त : 11:03:03 से 13:32:58 तक
अवधि : 2 घंटे 29 मिनट
समय जब चन्द्र दर्शन नहीं करना है : 09:11:59 से 20:52:59 तक

गणेश चतुर्थी व्रत व पूजन विधि
1.  प्रातः स्नान करने के बाद सोने, तांबे, मिट्टी की गणेश प्रतिमा लें.
2.  कलश में जल भरकर उसके मुंह पर कोरा वस्त्र बांधकर उसके ऊपर गणेश जी को विराजमान करें.
3.  गणेश जी को सिंदूर व दूर्वा अर्पित करके 21 लडडुओं का भोग लगाएं. इनमें से 5 लड्डू गणेश जी को अर्पित करके शेष लड्डू गरीबों या ब्राह्मणों को बाँट दें.
4.  शाम के समय गणेश जी का पूजन करना चाहिए. गणेश चतुर्थी की कथा, गणेश चालीसा व आरती पढ़ने के बाद अपनी दृष्टि को नीचे रखते हुए चन्द्रमा को अर्घ्य देना चाहिए.
5.  इस दिन गणेश जी के सिद्धिविनायक रूप की पूजा व व्रत किया जाता है.

By Newzzar

Leave a Reply

Your email address will not be published.