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चीन से मिल रही चुनौतियों के बीच भारत ने अपनी ताकात में इजाफा किया है. रक्षा मंत्रालय ने भारतीय नौसेना के लिए 6 नई स्टेल्थ-पनडुब्बियों के निर्माण का रास्ता साफ कर दिया. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली रक्षा खरीद परिषद की बैठक में स्ट्रैटेजिक-पार्टनरशिप मॉडल के तहत ‘प्रोजेक्ट-75 इंडिया’ (पी-75आई) को हरी झंडी मिल गई है. माना जा रहा है कि अब रक्षा मंत्रालय इस प्रोजेक्ट के तहत जल्द ही 6 ‘कन्वेंशनल’ सबमरीन के लिए आरएफपी जारी करेगी.

इस प्रोजेक्ट को स्ट्रैटेजिक-पार्टनरशिप मॉडल के तहत पूरा किया जाएगा, ऐसे में रक्षा मंत्रालय स्वदेशी शिपयार्ड्स को ये आरएफपी जारी करेगी. ये स्वेदशी शिपयार्ड्स किसी विदेशी कंपनी के साथ ज्वाइंट वेंचर में ही इन छह कन्वेंशनल यानी डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों का देश में ही निर्माण करेंगी. जानकारी के मुताबिक, ये छह कनवेंशनल पनडुब्बियां जरूर हैं, लेकिन ये एआईपी यानी एयर-इंडिपेंडेंट प्रोपेलशन सबमरीन है. इसका फायदा ये है कि इन्हें डीजल-इलेक्ट्रिक सबमरीन की तरह बार-बार समंदर से बाहर निकलने की जरूरत नहीं होगी. यानी, एक तरह से ये स्टेल्थ-सबमरीन होंगी.

रक्षा मंत्रालय ने जिन पांच विदेशी कंपनियों के साथ पार्टनरशिप में इन पनडुब्बियों को बनाने की मंजूरी दी है,उनमें रूस की रोसोबोरोनएक्सपोर्ट, फ्रांस की नेवल ग्रुप-डीसीएनएस, जर्मनी की थायसेनक्रूप, स्पेन की नोवंटिया और दक्षिण कोरिया की डेइवू कंपनी शामिल है.

By Newzzar

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