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वैश्विक कोरोना महामारी ने लोगों को शारीरिक, मानसिक और आर्थिक रूप से तबाह कर दिया है, कोरोना अपने साथ कई बीमारियों को निमंत्रण दे रहा है, कोरोना के बाद म्यूकोर्मिकोसिस, गैंग्रीन और अब म्यूकोर्मिकोसिस के साथ एस्परगिलस नामक फंगस रोगी के शरीर में प्रवेश कर गया है. राजकोट के सिविल अस्पताल में 100 से ज्यादा मरीजों का इलाज चल रहा है. कोरोना दर्दीयों को 20 से 40 दिनों के बाद यें फंगस विकसित होने की संभावना अधिक होती है.

एस्पिरिकस फंगस ने सिविल में 400 रोगियों में से 20 प्रतिशत के फेफड़ों को संक्रमित किया है, सामान्य दिनों में भी एस्परगिलस के मामले सामने आए थे. हालांकि, कोरोना के बाद रोगियों में एस्परगिलोसिस के मामले अब दोगुने हो रहे हैं, साथ ही एस्परगिलस कवक से फेफड़ों में पोस्ट-कोविड संक्रमण की घटनाओं में दो गुना वृद्धि हुई है.

एस्परगिलस के लक्षण क्या हैं?

एस्परगिलस में निमोनिया के समान लक्षण होते हैं. जिसमें रोगी को बुखार, कफ भरना और कफ में खून आना जैसे लक्षण दिखाई देते हैं साथ ही कफ का नमूना लेने के बाद रिपोर्ट करते हैं और जांच करते हैं कि यह एस्परगिलोसिस है या नहीं. जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है, उन्हें अस्थमा होता है, और अंग प्रत्यारोपण करवा चुके होते हैं, उनमें एस्परगिलोसिस विकसित होने की संभावना अधिक होती है.

By Newzzar

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