शिवरात्रि

महाशिवरात्रि भगवान शिव को प्रसन्न करने का सबसे अच्छा दिन है. इस दिन भोलेनाथ के उपासक उनकी पूजा-अर्चना से मनोवांछित फलों की प्राप्ति कर सकते हैं. शिव पर्व इस साल और भी ज्यादा खास होने जा रहा है. महाशिवरात्रि का पर्व 11 मार्च को है और ज्योतिषविदों के मुताबिक, 101 साल बाद इस त्योहार पर एक विशेष संयोग होने वाला है.

  • शिवलिंग पर जल चढ़ाएं, बिल्व पत्र चढ़ाएं और मिठाई का भोग लगाएं
  • शिवलिंग के सामने बैठकर महामृत्युंजय मंत्र का जाप जरूर करें। इस मंत्र के जाप से तनाव दूर होता है
  •  मंत्र जाप करते समय दीपक जलते रहना चाहिए
  •  हमेशा आसन पर बैठकर ही मंत्र जाप करें
  • जाप करते समय भक्त का मुख पूर्व दिशा की ओर रहना चाहिए

महामृत्युंजय मंत्र

ऊँ त्र्यंबकम् यजामहे सुगंधिम् पुष्टिवर्द्धनम्, ऊर्वारुकमिव बंधनात, मृत्योर्मुक्षियमामृतात्।।

अर्थ – हम तीन नेत्र वाले भगवान शिव का मन से ध्यान करते हैं. आप हमारे जीवन की मधुरता को पोषित और पुष्ट करते हैं, जीवन और मृत्यु के बंधन से मुक्त होकर अमृत की ओर अग्रसर हों.

महाशिवरात्रि पर यें है विशिष्ट संयोग

फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी युक्त चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि का त्योहार मनाया जाता है. 11 मार्च गुरुवार को त्रयोदशी और चतुर्दशी मिल रही है. इस दिन शिव योग, सिद्धि योग और घनिष्ठ नक्षत्र का संयोग बन रहा है. महाशिवरात्रि पर ऐसी घटना 101 साल बाद होने जा रही है. हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह इसी दिन हुआ था.

भोलेनाथ के विवाह में देवी-देवताओं समेत दानव, किन्नर, गंधर्व, भूत, पिशाच भी शामिल हुए थे. महाशिवरात्रि पर शिवलिंग को गंगाजल, दूध, घी, शहद और शक्कर के के मिश्रण से स्नान करवाया जाता है. ज्योतिषियों का ये भी कहना है कि फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को संसार के कल्याण के लिए शिवलिंग प्रकट हुआ था.

 

By Newzzar

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