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राष्ट्र भक्ति गानों की गूंज भी सुनाई दे रही है. गणतंत्र दिवस के मौके पर शायरी का भी खास महत्व माना जाता है. देश के कई बड़े शायरों ने इस मौके के लिए खास शायरी भी लिखी है.गणतंत्र दिवस के मौके पर शायरी का भी खास महत्व माना जाता है. हम आपको जानेमानें लेखको द्वारा लीखी हुए शायरी पढाने जा रहे है, जो आपमें नया जोश भर देंगी.

ख़ूँ शहीदान-ए-वतन का रंग ला कर ही रहा

आज ये जन्नत-निशाँ हिन्दोस्ताँ आज़ाद है

~अमीन सलोनी

फ़िदा-ए-मुल्क होना हासिल-ए-क़िस्मत समझते हैं

वतन पर जान देने ही को हम जन्नत समझते हैं

~आनंद नारायण मुल्ला

किन मंज़िलों लुटे हैं मोहब्बत के क़ाफ़िले

इंसाँ ज़मीं पे आज ग़रीब-उल-वतन सा है

~अदा जाफ़री

हमारे मुल्क की भाषा वो है जिसे हिंदू और मुस्लमान दोनों बोलते हैं। ये भाषा देवनागरी लिखावट में लिखी जाए तो हिन्दी है और अरबी लिखावट में लिखे जाने पर उर्दू है।

महात्मा गाँधी

याद अपने वतन की मुझे आती नहीं अब तो

अब भूल चुका होगा मुझे मेरा वतन भी

~सौरभ शेखर

शाम-ए-वतन कुछ अपने शहीदों का ज़िक्र कर

जिन के लहू से सुब्ह का चेहरा निखर गया

बहुत अज़ीज़ है अपने वतन की ख़ाक हमें

जो ख़्वाब आँखों में आया वो मोतबर आया

~जावेद अकरम फ़ारूक़ी

कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी

सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा !!

मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना

हिन्दी हैं हम वतन है हिन्दोस्ताँ हमारा !!

~Allama Iqbal

वफ़ा करो जफ़ा मिले, भला करो बुरा मिले

है रीत देश देश की, चलन चलन की बात है

~अख़तर मुस्लिमी

दिल से निकलेगी न मर कर भी वतन की उल्फ़त

मेरी मिट्टी से भी ख़ुशबू-ए-वफ़ा आएगी

~Shaheed BhagatSingh

ना जन्नत मैंने देखी है, ना जन्नत की तवक्क़ो है

मगर मैं ख़्वाब में, इस मुल्क का नक़शा बनाता हूँ

~Munawwar Rana

By Newzzar

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