corona vaccination in india

केंद्र सरकार ने लोगों के घर घर जाकर टीकाकरण करने की संभावना से उच्चतम न्यायालय में इनकार किया और कहा कि ‘‘अच्छे, उचित और तर्कसंगत कारणों’’ के लिए टीकाकरण कोविन पोर्टल पर पंजीकृत सरकारी एवं निजी कोविड टीकाकरण केंद्रों (सीवीसी) में किया जाएगा.केंद्र ने कहा कि कोविड​​-19 टीकाकरण कार्यक्रम के तहत सीवीसी की चार प्रमुख आवश्यकताएं- पर्याप्त स्थान, पर्याप्त कोल्ड स्टोरेज सुविधा, पर्याप्त संख्या में टीका लगाने वाले एवं चिकित्सकीय सहायक कर्मी की उपलब्धता और टीकाकरण के बाद प्रतिकूल प्रभाव के प्रबंधन के लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं हैं.

केंद्र का यह जवाब सुप्रीम कोर्ट के इस सवाल पर आया कि क्या वह कोरोना के टीकाकरण के लिए देशव्यापी जन जागरूकता अभियान चलाने और लोगों का उनके घर पर टीकाकरण निश्चित करने के लिए ग्रामीण इलाकों एवं वंचित वर्गों तक सचल वैन, वाहनों-रेलवे का उपयोग करके पहुंच सुनिश्चित करने की योजना बना रहा है ताकि लोगों को कम मुसाफरी करनी पड़े और कोरोना से संक्रमण की शक्यता कम हो.

सरकार ने कहा कि लाभार्थी अपने निवास पिन कोड के आधार पर कोविन सॉफ्टवेयर के माध्यम से पहचाने गए सीवीसी में रजिस्टर करवा सकते है,जिससे उन्हें पास के सीवीसी में टीकाकरण की सुविधा मिलेगी.

सरकार ने दिए यें कारण

केंद्र ने कहा, ‘‘वैक्सीनेशन के बाद 30 मिनट के लिए प्रत्येक लाभार्थी की निगरानी रखने के प्रोटोकॉल को बनाए रखना संभव नहीं है, क्योंकि प्रत्येक घर में एक या दो लाभार्थी हो सकते हैं और टीकाकरण टीम के लिए प्रत्येक और हर घर में 30 मिनट से अधिक समय रहना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं हो सकता है.’’ सरकार ने कहा कि इससे पूरे वैक्सीनेशन अभियान में ज्यादा समय लगेगा.

केंद्र सरकार ने कहा कि वैक्सीन को लगाने के लिए उसका विशेष तापमान बनाये रखने एवं संदूषण से बचाने के वास्ते उसे ‘‘वैक्सीन कैरियर’’ में रखने की जरूरत होती है. उसने कहा, ‘‘यदि टीका घर-घर लगाया जाता है तो टीके को रखने वाले बॉक्स को बार-बार खोलने की आवश्यकता होगी, जिससे उसके तापमान की सीमा को बनाये रखना मुश्किल होगा. टीके की प्रभावशीलता और टीकाकरण के बाद के प्रतिकूल प्रभाव रोकने के लिए टीके को सही तापमान में बनाये रखना आवश्यक है.

By Newzzar

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