Daad Bapu

पद्म श्री पुरस्कार विजेता कवि दाद बापू का निधन हो गया है. जूनागढ़ निवासी कवि दादू का नाम दादूदन प्रतापदान गढ़वी था. उनके निधन से साहित्य जगत पर भारी असर पड़ा है. गौरतलब है कि, जनवरी में, भारत सरकार ने कवि दाद को साहित्य में उनके योगदान के लिए पद्म श्री से सम्मानित किया था.

कवि दाद के पिता प्रतापदान गढ़वी नवाब के शासनकाल में जूनागढ़ के शाही कवि थे. इसलिए नवाब ने उन्हें ईश्वर्या और वेरावल का सापर गाँव दिया.

Padma Shri award honors poet Dad Bapu dies at the age of 82

कवि दाद ने 14-15 साल की उम्र में कविता रचना शुरू कर दी थी. उन्होंने मामा की मृत्यु के बाद उनकी याद में एक कविता लिखी और फिर माताजी के भजन लिखना शुरू किया.

कवि दाद ने लगभग 15 गुजराती फिल्मों में गीत लिखे हैं, जिनमें पूर्ण रामायण, रा नवघन, लाखा लोयान, भगत गोरो कुंभार शामिल हैं. 1975 की फिल्म शेतल कांठे के लिए बेटी का विदाई गीत ‘कालजा केरो काटो मारो, गांठथी छुटी गयो’ और फिल्म सेठ शेगलशा का गीत ‘धडवैया मारे ठाकोरजी नाथी थावू’ आज भी बहुत लोकप्रिय हैं.

“कैलास के निवासी नमु बार बार हू” प्रसिद्ध भजन नारायण स्वामी द्वारा गाया गया, जो स्वयं कवि दादे द्वारा रचित एक प्रसिद्ध भजन है. कवि दाद को “मेघानी साहित्य पुरस्कार”, “कवि दूला काग पुरस्कार”, “हेमू गढ़वी” आदि पुरस्कार से सम्मानित किया गया है.

By Newzzar

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